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नमामि गंगे कार्यक्रम के प्रमुख ने माना गंगा में डाली गईं थी लाशें

गंगा में लाशें डाले जाने की बात मिश्रा ने अपनी नई किताब “गंगा: रीइमैजिनिंग, रीजूवनेटिंग, रीकनेक्टिंग” में मानी है. इंडियन एक्सप्रेस अखबार में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक किताब का एक पूरा हिस्सा इसी घटना पर केंद्रित है.

इस हिस्से में मिश्रा ने लिखा है, “जैसे जैसे कोविड-19 महामारी की वजह से लाशों की संख्या बढ़ने लगी, जिला प्रशासन विह्वल हो गए, उत्तर प्रदेश और बिहार के शवदाहगृहों और श्मशान घाटों की क्षमता से ज्यादा लाशें आने लगी, ऐसे में गंगा में लाशों को डालना आसान हो गया.”

मिश्रा ने यह भी बताया है कि सभी मामले उत्तर प्रदेश के ही थे और नदी के बिहार वाले हिस्सों में जो लाशें मिली थीं वो उत्तर प्रदेश से ही बहकर वहां पहुंची थीं. सभी लाशें उत्तर प्रदेश के ही कन्नौज और बलिया के बीच गंगा में डाली गई थीं.


मिश्रा तेलांगना कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं. उनकी किताब का विमोचन प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष बिबेक देब्रॉय ने किया.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना काल के दौरान नदी में लाशों को बहाने के मामले पर . उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने Indian Express E Adda के साथ इंटरव्यू में कहा था कि इसे लेकर कुछ संस्थाओं ने खूब भ्रम फैलाया. इंडियन एक्सप्रेस को दिये इंटरव्यू में मुख्यमंत्री ने कहा कि, नदी के किनारे रहने वाले लोगों ने परंपरा के अनुरूप काम किया था. लेकिन इस पर कोई बात सुनने तक को तैयार नहीं था. सीएम योगी ने कहा कि, इस मुद्दे को लेकर दुनिया के सामने भारत की छवि धुमिल करने की कोशिश की गई.

आप ने नवाज देवबंदी का वह शेर तो सुना होगा

झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो
सरकारी एलान हुआ है सच बोलो

घर के अंदर तो झूठों की एक मंडी है
दरवाज़े पर लिखा हुआ है सच बोलो

गुलदस्ते पर यकजहती लिख रक्खा है
गुलदस्ते के अंदर क्या है सच बोलो

गंगा मइया डूबने वाले अपने थे
नाव में किसने छेद किया है सच बोलो

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