उत्तरप्रदेशफ़र्रूख़ाबाद

Ganga Expressway : सत्ता के चार विधायक और सांसद फिर भी बदनसीब फर्रुखाबाद

फर्रुखाबाद की जनता अब अपने जनप्रतिनिधियों को लेकर बहुत गुस्से में हैं क्योंकि मेरठ से इलाहाबाद तक बनने वाले गंगा एक्सप्रेसव पहले फर्रुखाबाद से होकर गुजरने वाला था अब वह वाया हरदोई होकर गुजरेगा. जिससे कि डिस्ट्रिक्ट फर्रुखाबाद की जनता का देश के अच्छे सड़क नेटवर्क से जुड़ने का सपना और सपना बनकर रह जाएगा.


देखा जाए तो प्रदेश के ज्यादातर जिले फोरलेन या सिक्स लाइन हाईवे से कनेक्ट हो चुके हैं उत्तर प्रदेश की राजनीतिक रूप से फर्रुखाबाद जिले की एक खास अहमियत है यह वही जिला है जो समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया की कर्मभूमि फर्रुखाबाद रहा हैं. यहीं से उन्होंने नहर रेट छोड़ो आंदोलन छेड़ा था। और लोकसभा का इलेक्शन भी लड़ा था. पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय जाकिर हुसैन भी इसी फर्रुखाबाद से आते है

फर्रुखाबाद को मिनी वाराणसी भी कहा जाता है क्योंकि बनारस के बाद सबसे ज्यादा घाट गंगा के किनारे इसी जिले में पढ़ते हैं वैसे तो मोदी सरकार पर्यटन को लेकर और हिंदूवादी अपनी छवि को लेकर बहुत सजग रहती है। इस पर्यटन नगरी फर्रुखाबाद को वह कैसे विकास से दूर रख सकती है आपकी जानकारी के लिए महाभारत की महत्वपूर्ण किरदार द्रौपदी भी इसी फर्रुखाबाद के कंपिल क्षेत्र से आती थीं

अगर देखा जाए तो उत्तर प्रदेश के सभी जिले कहीं ना कहीं फोरलेन या सिक्स लेन हाईवेज के नेटवर्क से कनेक्ट हो चुके हैं अब फर्रुखाबाद अभी भी फोरलेन हाईवे से या किसी बड़े हाईवे से फिर वंचित रह गया है अब इसको जनप्रतिनिधियों की सुस्ती कहे या उनकी मजबूरी? कि फर्रुखाबाद की कायाकल्प करने वाले इस हाइवे को फर्रुखाबाद की किस्मत से दूर जाने दिया। आखिर क्या मजबूरी है या थी कि वह अपनी आवाज विधानसभा और लोकसभा में में मजबूती से नहीं रख पाए। वर्तमान में फर्रुखाबाद की 4 विधानसभा सीटों में सत्तासीन योगी आदित्यनाथ की से ही चारों विधायक आते हैं। और केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार के सांसद मुकेश राजपूत भी इसी फर्रुखाबाद लोकसभा सीट से सांसद हैं। जनता के हक की सबसे बड़ी लड़ाई में इन चारों विधायक और चारों सांसदों का कोई रोल दिखाई नहीं पड़ रहा है। जनता लगातार सोशल मीडिया पर यह सवाल कर रही है आखिर क्या मजबूरी रही होगी कि इन लोगों ने फर्रुखाबाद की किस्मत से विकास को यूं ही जाने दिया |

Old Route BSP Government

बसपा सरकार के दौरान मायावती सरकार में जो नक्शा पास हुआ था उसमें एक्सप्रेसवे फर्रुखाबाद से होकर गुजर रहा था . पर योगी आदित्यनाथ की सरकार आने पर जब डीपीआर और नया नक्शा तैयार हुआ तो उसमें फर्रुखाबाद को छोड़ दिया गया अब यह एक्सप्रेस वे हरदोई से होकर गुजरेगा. इसी बात को लेकर पूरे फर्रुखाबाद जिले की जनता आक्रोश में है

फर्रुखाबाद जिला अपने जरदोजी कारीगरी ,नमकीन, तम्बाकू, पौधों की नर्सरी और आलू के लिए बहुत प्रसिद्ध है अगर यह एक्सप्रेस वे अगर फर्रुखाबाद से होकर गुजरता फर्रुखाबाद का किसान अपने आलू की पहुंच बहुत ही कम समय में देश भर की मंडियों में आसान हो जाती. और व्यापारी वर्ग भी अपने माल को दिल्ली लखनऊ जैसे बड़े मार्केट को ३ से 5 घंटे की दुरी में तय कर सकता था

यहां का किसान 2 महीने के अंदर आलू की फसल पैदा करता है । और यह आलू की कच्ची फसल जिसको तुरंत एक बड़े मार्केट की जरूरत होती है वह है मार्केट गंगा एक्सप्रेस के जरिए दिल्ली अलीगढ़ बरेली लखनऊ इलाहाबाद और बनारस तक आसानी से उपलब्ध हो सकता था अगर यह गंगा एक्सप्रेसवे फर्रुखाबाद से होकर गुजरता | ये बदनसीब जिला फिर से विकास की और अग्रसर हो सकता था अब जनता अपने जनप्रतिनिधियों की सुस्ती की वजह काफी नाराज नजर आ रही है| 2022 में विधानसभा इलेक्शन है. और ये एक बड़ा मुद्दा होगा जिले के जनप्रतिनिधियों के लिए |

गंगा एक्सप्रेस वे को फर्रुखाबाद से जोड़ने के लिए किसान हितों के लिए काम करने वाले रिंकू कटियार अपने युवा साथी और जिले भर के बुद्धिजीवी वर्ग को साथ लेकर बीते तीन दिन से अनिश्चितकालीन धरना दे रहे है | धरना शुरू करने के तीन दिन बाद जनता का आक्रोश अपने जनप्रतिनिधयो के खिलाफ सोशल मीडिया से लेकर सड़क पर दिखने लगा है इसी क्रम में भारतीय किसान यूनियन का भी समर्थन मिला रहा हैं आंदोलन में किसान यूनियन के नेता उतरे, कई अधिवक्ताओं का भी समर्थन मिलता दिख रहा है |

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