चुनावराजनीति

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को फिर से जीवित करने में लगा हुआ है किसान का बेटा

एक ऐसा किसान पुत्र जो बर्तमान में उत्तरप्रदेश में किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष है हम बात कर रहे तरुण पटेल की जो आजकल अपने युवा जोश के साथ उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को संजीवनी देने का काम कर रहे है कभी चार महीने की रथ यात्रा तो कभी फाग चौपाल का आयोजन करवा कर किसानों के बीच कांग्रेस की विचारधारा से रूबरू करवा रहे है। सूत्रों के अनुसार तरुण पटेल को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के सबसे करीब माना जाता रहा है।

तरुण पटेल एक ऐसे युवा नेता जो अपने छात्र राजनीति से अब तक लगभग 15 सालों से भी अधिक समय से कांग्रेस की विचारधारा के प्रति पूर्णतयः समर्पित रहे है

लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्र रहे तरुण पटेल अपने छात्र जीवन में छात्रों के हक़ के लिए कई बार जेल गए । जिसने तमाम यातनाएँ सहीं, जेल के भीतर भूख हड़ताल की । छात्रों की माँगों को मनवाने के लिए जेल के भीतर ही आखिरी दम तक अपनी जिद पर अड़े रहे !

जो अपने संघर्ष और मेहनत के दम पर उत्तर प्रदेश युथ कांग्रेस का सबसे पहला इलेक्टेड प्रेसिडेंट बना। जो अपनी लोकप्रियता के दम पर बहुत ही कम उम्र में प्रदेश की राजनीति में पिछड़ों के कद्दावर नेताओं में गिना जाने लगा. जिसकी राजनीतिक हैसियत बहुत ही कम समय में उत्तर प्रदेश कांग्रेस में पूर्व गृह राज्य मंत्री आर.पी.एन. सिंह के बाद नंबर 2 के कुर्मी नेता के रूप में होने लगी।

जिसने कभी अवसरवाद की राजनीति नहीं की। जबकि कई बार ऐसे लुभावने अवसर आये. जिसमें संवैधानिक सत्ता में भागीदारी का अवसर सीधे हाथ में था. वह भी जगदम्बिका पाल या रीता बहुगुणा जोशी की तरह सांसद या विधायक या अब तक मंत्री भी बन सकते थे। लेकिन उन्होंने हमेशा वैचारिक मूल्यों से प्रेरित राजनीति को तरजीह दी. कांग्रेस पार्टी के साथ बुरे से बुरे दौर में पूरी वफादारी से खड़े रहे। गाँधी-नेहरू की विचारधारा को मजबूत करने में लगे रहे। तरुण पटेल छात्र राजनीति शुरुआत से ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी के खास बने हुए है.

तरुण पटेल उत्तरप्रदेश किसान कांग्रेस अध्यक्ष

एक बार तरुण पटेल भूख हड़ताल पे बैठे हुए थे। तब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जेल में जाकर खुद भूख हड़ताल तुड़वाई। अखिलेश यादव का समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने के लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कई बार ऑफर मिला। यहाँ तक कई सालों तक अखिलेश यादव खुद लगातार अपनी पार्टी में लाने में प्रयासरत रहे। लेकिन उसने उस ऑफर को हर बार ठुकरा दिया। जिसका बदला अखिलेश यादव ने नाराज होकर 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लिया। सपा-कांग्रेस गठबंधन होने के बावजूद भी अखिलेश यादव ने उस नेता के ख़िलाफ़ सपा के उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा।

उन्होंने कांग्रेस के सबसे बुरे दौर से चुनावी राजनीति में भाग लेना शुरू किया. चंदौली लोकसभा से पार्टी के सबसे कम उम्र के प्रत्याशी के तौर पर पहला चुनाव लड़ा।
उसी जिले से आने वाले वर्तमान में भारत सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जब अपना पहला लोकसभा चुनाव उसी क्षेत्र से लड़ा था तो उन्हें मात्र 8,000 वोट प्राप्त हुए थे. लेकिन उसे मात्र एक महीने के चुनाव अभियान में बिल्कुल अनजान लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के सबसे बुरे दौर में 32,500 वोट प्राप्त हुआ। जिसने पूरी चंदौली लोकसभा को 25 दिन के पैदल मार्च करके नाप दिया।

जो हमेशा कांग्रेस पार्टी की राजनीति में चाटुकारों, दलालों और काहिल नेताओं की आँखों का किरकिरी बना रहा। जिसकी राजनीति से उत्तर प्रदेश से आने वाले अधिकतर मठाधीश कांग्रेसी नेताओं दिक्कत रही. इसलिए वे हमेशा राजनीतिक राह का रोड़ा बनते रहे. जिसका नतीजा था कि 2014 में डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र से चुनाव की तैयारी कर रहे उस नेता को ऐन मौके पर चंदौली लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए भेज दिया गया। फिर भी वह पार्टी के इस प्रतिकूल फैसले का सम्मान किया।

एक ऐसा युवा नेता जिसने अपनी पूरी राजनीति किसानों के लिए समर्पित किया। किसानों के सम्मान, स्वाभिमान व उनके अधिकारों की ख़ातिर आजीवन हरी पगड़ी पहनने का संकल्प लिया। जिसने कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से बंजर हो चुकी उत्तर प्रदेश की सरजमीं को गाँधी की विचारधारा और कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने के लिए चार महीनें तक दिन-रात जोतता रहा।

हमेशा से की कांग्रेस सेक्युलर विचार धारा को साथ ले के चलने वाले इस नौजवान नेता का अपना अलग ही स्टाइल है

जिसने बहुत कम उम्र में देश की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक यात्रा की. जो महात्मा गाँधी के 150 वें जन्म-वर्ष के अवसर पर उनके जन्म जयंती से लेकर उनकी शहादत दिवस तक पूरे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों, 200 तहसीलों और 250 विधानसभाओं की 121 दिनों की यात्रा की। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने पाँच महीनें की लगातार देश में पद यात्रा की थी। जो देश की सबसे बड़ी राजनीतिक यात्रा थी।

एक ऐसा नेता जिसकी जिद और जूनून ही उसके राजनीतिक भविष्य का सबसे बड़ा रोड़ा बनता दिखाई पड़ रहा है. क्योंकि चार महीनें की प्रदेश व्यापी यात्रा से पूरी तरह से साफ़ हो चुका था कि वह कांग्रेस पार्टी का मुलायम सिंह यादव बनना चाहता है। जिसकी महत्वाकांक्षा से पूरा उत्तर प्रदेश कांग्रेस डरा हुआ है। लोगों को लगता है कि वह एक दिन प्रदेश का मुख्यमंत्री बन सकता है. इसलिए उसके समकक्ष के साथ-साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता उसकी राजनीतिक हत्या करने पर तुले हुए हैं।

उत्तरप्रदेश कोंग्रेस के वरिष्ठ नेता भी इस युवा नेता का जमकर विरोध करते हैं क्यों कि उन्हें लगता है कि अगर यह व्यक्ति एक बार भी चुनाव जीत गया तो उसे गाँधी परिवार के अलावा उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा नेता बनने से कोई नहीं रोक पायेगा। इसके पीछे एक बड़ा कारण भी है की पिछड़े किसान बर्ग की सबसे बड़ी जाति वर्ग से आते. उनकी जाति लगभग उत्तरप्रदेश के 50 जिलों में अच्छा खासा प्र्भाव है वर्तमान भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष भी उनकी जाति वर्ग (कुर्मी किसान ) से आते है.आगरा जनसँख्या के आधार पे देखे तो कुर्मी, काछी कुसवहा जाती की जनसँख्या लगभग २० % है जो किसी भी पार्टी को उत्तरप्रदेश की कमान सभालने में बहुत अहम किरदार निभाती है

क्योंकि वर्तमान समय में कांग्रेस की जमीनी राजनीति का सबसे बड़ा घोषित नेता मात्र 35 साल की उम्र में ही बन चुका चुका है। उत्तर प्रदेश का कोई नगर, नुक्क्ड़, चौराहा, शहर और क़स्बा नहीं है जो उस व्यक्ति को जानता न हो। उत्तर प्रदेश कांग्रेस का वह एकमात्र नेता है जिसका मिर्जापुर से लेकर मेरठ और बलिया से लेकर बुलंदशहर तक जमीनी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त पकड़ है. जो लोगों को वह बायकायदा से नाम से जानता और पहचानता है।

वह युवा नेता जो आज पूरे हिन्दुस्तान में नैतिक मूल्यों की राजनीति के अंग्रिम पंक्ति के युवा हस्ताक्षर है. जो 21वीं सदी में देश की राजनीतिक जमीन पर महात्मा गाँधी की विचारधारा को जन-जन तक ले जाने वाला सबसे बड़ा प्रतिनिधि है. जिसने हमेशा दिन के उजाले में राजनीति की। अवसरवाद और स्वार्थप्रेरक राजनीति से कोसों दूर रहा। जिसकी गिनती उत्तर प्रदेश सबसे साफ़-सुथरे, ईमानदार, जुझारू नेता की छवि है। उस युवा नेता का नाम है तरुण पटेल। जो आज की तारीख में उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी जिद और जूनून के लिए जाना जाता है।

बाधाएं आती हैं आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएं
पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं।
निज हाथों में हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा
कदम से कदम मिलाकर चलना होगा।

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