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UP Election 2022 : अपना दल को सिर्फ 14 सीट देने को तैयार

भाजपा द्वारा दी हुई 14 सीटों की लॉलीपॉप लेकर अनुप्रिया पटेल क्या अपने समाज के सामने जा पाएंगी

भारतीय जनता पार्टी का सहयोगी दल (APNA DAL S)अपना दल को सिर्फ 14 सीटें मिलने की बात की जा रही है जबकि अपना दल का जो जाति वोट बैंक है वह उत्तर प्रदेश में लगभग 12 से 14 परसेंट है उत्तर प्रदेश में अगर भौगोलिक परिस्थिति की बात की जाए तो रामपुर बरेली पीलीभीत फर्रुखाबाद बदायूं कानपुर शाहजहांपुर पीलीभीत लखीमपुर सीतापुर हरदोई उन्नाव फतेहपुर सुल्तानपुर फैजाबाद बस्ती गोरखपुर देवरिया सोनभद्र मिर्जापुर वाराणसी और झांसी कहा जाए तो रामपुर से सुरु होकर बिहार बॉर्डर तक लगभग हर जिले में कुर्मी समाज की अच्छी खासी आवादी हैं ज्यादातर सीटों पर कुर्मी वोट निर्णायक भूमिका में है और लगातार भाजपा पिछड़े वर्ग को हाशिये पर रखने का मन बना रही है। उत्तर प्रदेश में कुर्मी जाति के बौद्धिक वर्ग अनुसार अगर अपना दल को भाजपा उचित भागीदारी नहीं देती है तो जिन सीटों पर प्रत्याशी नहीं है उन पर कुर्मी समाज समाजवादी पार्टी को वोट करेगा अगर ऐसा होता है तो भाजपा की हार का यह सबसे बड़ा कारण होगा। और शायद 2022 विधान सभा इलेक्शन यूपी में भाजपा पिछड़े वर्ग की नाराजगी के कारण ही सत्ता से बाहर भी हो सकती है

दस का शासन नब्बे पर,

नहीं चलेगा, नहीं चलेगा। सौ में नब्बे शोषित है,

नब्बे भाग हमारा है।

धन-धरती और राजपाट में,

नब्बे भाग हमारा है।

शहीद बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा जी

अभी तक ज्यादातर कुर्मी वोट भाजपा के पक्ष में पढ़ता आया है पर जैसे ही अनुप्रिया पटेल के अपना दल का कद बढ़ा वैसे ही कुर्मी समाज ज्यादातर समाजवादी पार्टी की तरह अपना दल को अपनी पार्टी स्वीकार करने लगा था अगर बंटवारे में अपना अपना दल को सिर्फ 14 सीट ही मिल रही हैं तो कुर्मी समाज अनुप्रिया को अपना नेता स्वीकार नहीं कर पाएगा। पीछे बड़ी वजह भी है पिछड़े वर्ग में यादवों के बराबर आबादी वाला कुर्मी समाज अब उत्तर प्रदेश में सत्ता में बराबर की हिस्सेदारी जा रहा है। कुर्मी समाज को यह फर्क अब नहीं पड़ता है कि वो हिस्सेदारी भाजपा दे या समाजवादी पार्टी कुर्मी समाज के ज्यादातर बुद्धिजीवी माने जाने वाले लोगों का कहना है कि वह कुर्मी सिर्फ उसके साथ जाएगा जो सबसे ज्यादा टिकट देगा।

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बता दें कि 2017 में भाजपा ने अपना दल (एस) को 11 सीट दिया था। इनमें अपना दल 9 सीटों पर चुनाव जीत पाई थी। इनमें  सेवापुरी (वाराणसी), मडियाहूं (जौनपुर), छानबे (मिर्जापुर), दुद्धी (सोनभद्र), सोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर), जहानाबाद (फतेहपुर), प्रतापगढ़ सदर व विश्वनाथगंज (प्रतापगढ़) और सोरांव (प्रयागराज) शामिल हैं। जबकि प्रयागराज जिले की प्रतापपुर और हंडिया सीट पर पार्टी को हार हाथ लगी थी। लेकिन इस बार पार्टी ने दो दर्जन सीटों पर भाजपा हाईकमान के सामने दावेदारी पेश कर दी है।

12 से 14 सीटों की हैसियत रखने वाली लोकदल को अखिलेश यादव ने 40 सीटों से नवाजा है और तमाम पिछड़े वर्ग से गठबंधन में अच्छी पार्टनरशिप की है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक अच्छी तरह से जानता है। कि अगर उत्तर प्रदेश में कुर्मी जाति ने अपनी ताकत पहचान ली। सत्ता प्राप्त से इनको कोई वंचित नहीं कर सकता है। इसीलिए किसी ना किसी प्रकार कुर्मी समाज को नेताओं में और अलग-अलग तरीकों से उलझा के इस तरह के समझौते किए जा रहे हैं। हालांकि अनुप्रिया पटेल ने Kurmi samaj को बहुत हद तक अपने पाले में कर लिया है। और उचित भागीदारी अगर नहीं कर पाती हैं तो नेतृत्व उनके हाथ से निकल सकता है

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